Making song
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जगत मिथ्या, जगत खेला, जगत तेरी ही माया है।।
जगत तेरी, जगत तुझसे, जगत तूने बनाया है।।
प्रभु मुझको जगह दो तुम ।
प्रभु अपने ही चरणों में ।
रमा दो हमको अपने मेंं ।
प्रभु अपने ही भक्ति में ।
जगत मिथ्या, जगत खेला, जगत तेरी ही माया है।।
जगत तेरी, जगत तुझसे, जगत तूने बनाया है।।
करे जीवोंं की तू रक्षा ।
करे दुखियों पे छाया हो ।
बना के श्रृष्टि को तुमने ।
जगत के काज सवारे हो ।
जगत मिथ्या, जगत खेला, जगत तेरी ही माया है।।
जगत तेरी ,जगत तुझसे ,जगत तूने बनाया है।।
प्रभु दुखियों के तुम साथी।
अंधो के सहारे हो ।
किया जिसने भी तेरी भक्ति।
तूने सबको ही तारे हो ।
जगत मिथ्या, जगत खेला, जगत तेरी ही माया है ।।
जगत तेरी ,जगत तुझसे ,जगत तूने बनाया है।।
करूं मैं तेरी भक्ति।
चरण की धूल पाने को।
रमा दो अपनी भक्ति में।
टरू जीवन व मुक्ति से।
डरे वही मृत्यु से।
जिसे मृत्यु ने घेरा है।
मुझे डर है ना मृत्यु से।
मुझपे गिरधर की छाया है।
जगत मिथ्या, जगत खेला, जगत तेरी ही माया है।।
जगत तेरी, जगत तुझसे, जगत तूने बनाया है।।
Writer -- VINAY SHRIVASTAV


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