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कहाँ से चला था ,
कहाँ तक चला हूँ ।
बता दे नसीब मेरे ,
क्यो तूंं खफा है ।।
ये कैसा खेला है ,
जिसे मैंंने झेला है ।
सपनो के मित मेरे ,
साँसो की धारा ।
जहाँ से चला हूँ ,
वहीं फिर हूँ दोबारा ।
अब तो बता दे ,
क्यो रे सताता है तूंं ।
कहाँ से चला था ,
कहाँ तक चला हूँ ।
बता दे नसीब मेरे ,
क्यो तूंं खफा है ।।
किस्मत की रेखा है ,
इसे किसने देखा है ।
मन की है सब उपज ,
इसे किसने निरेखा है ।
किस्मत से डरता है क्यो ।।।
कहाँ से चला था ,
कहाँ तक चला हूँ ।
बता दे नसीब मेरे ,
क्यो तूं खफा है ।।।।।

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